फर्रुखाबाद(द दस्तक 24): जनपद के विकासखंड कमालगंज के ग्राम कोरीखेड़ा में शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को कृषि भूमि के बंटवारे एवं आपसी आवागमन को लेकर तीन हिस्सेदारों की सहमति से चकरोड निकाला गया। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों की उपस्थिति में भूमि की पैमाइश कर सीमांकन किया गया।
जानकारी के अनुसार स्वर्गीय दयाराम शाक्य के पुत्र रघुवीर सिंह, राजबीर सिंह एवं अजयबीर सिंह, स्वर्गीय मोतीलाल शाक्य के पुत्र विजयपाल, शिशुपाल एवं राजपाल शाक्य तथा स्वर्गीय गेंदालाल शाक्य के पुत्र राधेश्याम शाक्य, रामवीर शाक्य, धर्मवीर सिंह शाक्य एवं रनवीर सिंह शाक्य उक्त भूमि के मूल निवासी/हिस्सेदार परिवारों से संबंधित हैं।
बताया गया कि खसरा संख्या 198 की कृषि योग्य भूमि की पैमाइश के दौरान पूर्व दिशा में लगभग 453 फुट, पश्चिम में 442 फुट तथा उत्तर दिशा में लगभग 440 फुट का क्षेत्र बताया गया। उक्त कृषि भूमि में तीन बराबर हिस्सेदारों की आपसी सहमति के आधार पर हिस्सों का निर्धारण किया गया।
आपसी सहमति से भूमि के पूर्वी तरफ उत्तर से दक्षिण दिशा में नौ फुट चौड़ा चकरोड निकालने का निर्णय लिया गया। सहमति के अनुसार इस चकरोड पर तीनों हिस्सेदारों का अधिकार रहेगा तथा इसका उपयोग आपसी आवागमन के लिए किया जाएगा। चकरोड वाले हिस्से पर कोई भी पक्ष मकान या अन्य स्थायी निर्माण नहीं करेगा।
भूमि के शेष हिस्से का सीमांकन करने के लिए सीमेंट के लट्टे गाड़कर हिस्सों को चिह्नित किया गया। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार पैमाइश और सीमांकन की प्रक्रिया आपसी सहमति से संपन्न हुई तथा इस दौरान किसी प्रकार का विवाद नहीं हुआ।
उक्त भूमि के उत्तर एवं दक्षिण दिशा में पहले से चकरोड निकलने की स्थिति भी बताई गई। यदि भविष्य में पैमाइश के दौरान चकरोड की वजह से किसी हिस्सेदार के हिस्से में कमी या अधिकता पाई जाती है तो तीनों हिस्सेदारों के बीच आपसी सहमति से हिस्से को बराबर किया जाएगा।
भूमि की पैमाइश एवं चकरोड निर्धारण का कार्य प्रहलाद सिंह वर्मा, पूर्व अध्यापक, एवं सुदामा चरण शाक्य द्वारा किया गया। इस दौरान रामवीर शाक्य ग्राम विकास अधिकारी, रनवीर सिंह, डॉ. धर्मवीर सिंह, राजीव कुमार, अजयवीर, राजवीर सिंह, शिवम शाक्य, राजपाल शाक्य, विजयपाल, अनमोल शाक्य, अवनीश कुमार पाल, ननकूलाल, अनिरुद्ध राजपूत, हर्षित शुक्ला, ओमदीप, नितिन कुमार, पंकज कुमार शाक्य सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे।
मौके पर उपस्थित लोगों ने आपसी सहमति एवं सहयोग से भूमि के आवागमन संबंधी व्यवस्था तय किए जाने को सकारात्मक कदम बताया। पैमाइश के बाद हिस्सों को चिह्नित कर दिए जाने से भविष्य में भूमि एवं रास्ते को लेकर विवाद की संभावना कम होने की उम्मीद जताई गई।