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13 खबरें
दिवाली के सरकारी उपहार: किसी को महँगाई, किसी को ज़हरीली हवा, किसी को सिर्फ़ सुनवाई
संपादकीय 29 Oct 2026, 10:05 PM

दिवाली के सरकारी उपहार: किसी को महँगाई, किसी को ज़हरीली हवा, किसी को सिर्फ़ सुनवाई

किसी को महँगाई भत्ते में बढ़ोतरी, किसी को प्रदूषण भरी हवा, किसी को शिकायतों पर सुनवाई और किसी को चुनावी नतीजों से राजनीतिक संदेश। इस सप्ताह की घटनाओं को जोड़ता एक तीखा सवाल—क्या व्यवस्था जनता की ज़रूरतें पूरी कर रही है, या सिर्फ़ अपने हिसाब से जवाब दे रही है? उपहार वह है जो ज़रूरत पूरी करे। जो समस्या का समाधान न करे, वह सिर्फ़ निपटारा है। पूरा संपादकीय पढ़िए और बताइए—इस सप्ताह आपको व्यवस्था से क्या मिला?

हार देखना भी लोकतंत्र की परीक्षा है: वोट से लेकर संस्थाओं तक जवाबदेही के सवाल
संपादकीय 28 Oct 2026, 06:03 PM

हार देखना भी लोकतंत्र की परीक्षा है: वोट से लेकर संस्थाओं तक जवाबदेही के सवाल

सुबह की चाय पर कुछ कड़वे सवाल। चुनाव में हार स्वीकार करने से लेकर मतदाता-सूची की पारदर्शिता, सत्ता की जवाबदेही और चेतावनियों को गंभीरता से लेने तक—यह टिप्पणी लोकतंत्र में नागरिक, संस्थाओं और सार्वजनिक जिम्मेदारी के रिश्ते पर विचार करती है।

चौदह असहमतियाँ, एक सर्वसम्मति: लोकतंत्र का नया गणित
संपादकीय 27 Oct 2026, 05:36 PM

चौदह असहमतियाँ, एक सर्वसम्मति: लोकतंत्र का नया गणित

यह राजनीतिक व्यंग्य लोकतंत्र में सर्वसम्मति के दावों और असहमति की वास्तविक भूमिका पर सवाल उठाता है। निर्वाचन आयोग के हलफ़नामे में सर्वसम्मति के दावे को केंद्र में रखकर लेख चुनावी प्रक्रिया, संस्थागत पारदर्शिता, कर्मचारियों की छँटनी, अधिकारियों के राजनीति में प्रवेश और विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी ख़बरों पर व्यंग्य करता है। लेख का मूल तर्क है कि लोकतंत्र की ताक़त सबका एकमत होना नहीं, बल्कि असहमति को जगह देना, उसे दर्ज करना और उसका सम्मान करना है।

ब्रह्मांड में हरा-सफेद बौना तारा और गुलाबी तारे का रहस्य: क्या विज्ञान बदल रहा है हमारी सोच?
संपादकीय 22 Oct 2026, 12:15 PM

ब्रह्मांड में हरा-सफेद बौना तारा और गुलाबी तारे का रहस्य: क्या विज्ञान बदल रहा है हमारी सोच?

ब्रह्मांड में तारों के रंग और उनके जीवनचक्र को लेकर विज्ञान लगातार नई जानकारियाँ सामने ला रहा है। सफेद बौने तारे किसी तारे के विकास की अंतिम अवस्था का अवशेष होते हैं। तारों का रंग उनके तापमान और प्रकाश के गुणों से जुड़ा है। यह लेख ब्रह्मांड की विविधता, तारों की मृत्यु और प्राकृतिक प्रक्रियाओं के आधार पर धार्मिक मान्यताओं तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच के अंतर पर सवाल उठाता है।

विजयादशमी पर अपने ‘गांडीव’ को पहचानिए: मतदाता सूची में नाम ही लोकतंत्र का असली शस्त्र
संपादकीय 20 Oct 2026, 11:13 AM

विजयादशमी पर अपने ‘गांडीव’ को पहचानिए: मतदाता सूची में नाम ही लोकतंत्र का असली शस्त्र

विजयादशमी पर शस्त्र-पूजा की परंपरा हमें अपने सामर्थ्य और जिम्मेदारी की याद दिलाती है। लेकिन लोकतंत्र में आम नागरिक का सबसे बड़ा शस्त्र उसका मताधिकार है। मतदाता सूची में नाम की मौजूदगी क्यों जरूरी है? महाभारत के अर्जुन और शमी वृक्ष के प्रसंग के माध्यम से यह संपादकीय लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संदेश देता है।

लंदन में लोकतंत्र की आवाज़, दिल्ली में बंद रास्ते: गांधी की प्रतिमा के सामने भारत का सवाल
संपादकीय 18 Oct 2026, 09:07 PM

लंदन में लोकतंत्र की आवाज़, दिल्ली में बंद रास्ते: गांधी की प्रतिमा के सामने भारत का सवाल

लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में गांधी की प्रतिमा के सामने भारतीय प्रदर्शनकारियों के दो समूहों का दृश्य लोकतंत्र, राजनीतिक असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़ा करता है। एक ओर ‘वोट चोरी बंद करो’ के नारे हैं, दूसरी ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में आवाज़ें। इस दृश्य को भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की अंतरराष्ट्रीय परंपरा, गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों तथा दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों पर लगाए गए प्रतिबंधों के संदर्भ में देखा गया है। संपादकीय का मूल प्रश्न है कि क्या भारतीय नागरिक अपने देश में उतनी स्वतंत्रता से असहमति व्यक्त कर सकते हैं, जितनी उन्हें विदेश में मिलती है? यह लेख सभी पक्षों के विरोध करने के अधिकार को स्वीकार करते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं और सार्वजनिक विरोध स्थलों की भूमिका पर विचार करता है।

भविष्य की पाठ्यपुस्तक का एक काल्पनिक अध्याय, जो आज के भारत से सवाल करता है
संपादकीय 18 Oct 2026, 09:06 PM

भविष्य की पाठ्यपुस्तक का एक काल्पनिक अध्याय, जो आज के भारत से सवाल करता है

वर्ष 2076 की एक काल्पनिक राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक के माध्यम से यह लेख अक्टूबर 2026 के भारत की तस्वीर प्रस्तुत करता है। इसमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने, विरोध प्रदर्शनों, हिरासत, अदालतों में सरकारी जवाबदेही और आम नागरिक के मताधिकार जैसे मुद्दों को भविष्य के इतिहास की दृष्टि से देखा गया है। लेख का केंद्रीय प्रश्न है कि यदि किसी नागरिक को अपनी लोकतांत्रिक पहचान साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़े, तो लोकतंत्र की वास्तविक स्थिति क्या है? अंत में पाठक से अपने परिवार और मुहल्ले में मतदाता सूची की जाँच करने तथा नागरिक अधिकारों के प्रति सजग रहने की अपील की गई है।

बैरिकेड के इस पार भी लड़का, उस पार भी लड़का: लोकतंत्र के बीच खड़ी व्यवस्था
संपादकीय 17 Oct 2026, 03:55 PM

बैरिकेड के इस पार भी लड़का, उस पार भी लड़का: लोकतंत्र के बीच खड़ी व्यवस्था

कनॉट प्लेस के बैरिकेड के दोनों ओर खड़े प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी की तस्वीर के माध्यम से यह संपादकीय भारतीय लोकतंत्र, नागरिक अधिकारों और व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाता है। मतदाता सूची से नाम हटने, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की जगह सीमित होने, अदालतों में सरकारी जवाबदेही और विरोध करने के अधिकार जैसे मुद्दों के बीच लेख बताता है कि लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं, बल्कि नागरिकों के भरोसे और अधिकारों से मजबूत होता है। इसका केंद्रीय सवाल है—जब प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी दोनों इसी समाज का हिस्सा हैं, तो उनके बीच टकराव की स्थिति पैदा करने वाली व्यवस्था की जवाबदेही कौन तय करेगा?

अर्थशास्त्र का नोबेल: रसोई के खर्च से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक, जनता के भरोसे की अहम भूमिका
संपादकीय 14 Oct 2026, 06:18 PM

अर्थशास्त्र का नोबेल: रसोई के खर्च से लेकर देश की अर्थव्यवस्था तक, जनता के भरोसे की अहम भूमिका

“राष्ट्र की आर्थिक मजबूती केवल नीतियों से नहीं, बल्कि उन नीतियों पर जनता के भरोसे और उसके भविष्य के प्रति विश्वास से भी बनती है।”

देश तब बीमार होता है, जब नागरिक सवाल पूछना छोड़ देते हैं
संपादकीय 14 Oct 2026, 06:16 PM

देश तब बीमार होता है, जब नागरिक सवाल पूछना छोड़ देते हैं

एक देश तब कमजोर होता है, जब सवाल पूछना अपराध और चुप्पी मजबूरी बन जाए। लोकतंत्र, नागरिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थाओं पर जनता के भरोसे को लेकर एक विचारोत्तेजक @ संपादकीय

रायपुर :-भगवान श्री राम हमारे आदर्श है - टंक राम वर्मा
संपादकीय 21 Feb 2022, 12:53 AM

रायपुर :-भगवान श्री राम हमारे आदर्श है - टंक राम वर्मा

सौरभ सिंह यादव - तिल्दा नेवरा ः- समीपस्थ ग्राम अल्दा मे राज्य स्तरीय श्री राम लीला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। छठवें दिवस पर किरना के श्री राम मंडली के द्वारा भरत मिलाप लीला का मंचन किया गया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समाजसेवी एवं जिला पंचायत रायपुर के उपाध्यक्ष टंक राम व