लहरा घाट पर WWF-इंडिया और वन विभाग ने कराया विमोचन कार्यक्रम, दो प्रजातियों के कछुओं को मिला प्राकृतिक आवास
कासगंज। गंगा नदी की जलीय जैव विविधता को संरक्षित करने और विलुप्त होती मीठे पानी के कछुओं की आबादी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को लहरा गंगा घाट पर 244 नवजात कछुओं को गंगा की धारा में छोड़ा गया। गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किए जाने की वर्षगांठ के अवसर पर WWF-इंडिया ने जिला गंगा समिति एवं वन विभाग कासगंज के सहयोग से कछुआ हैचलिंग विमोचन कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम के दौरान Pangshura smithii (ब्राउन रूफ्ड टर्टल) और Pangshura tentoria (इंडियन टेंट टर्टल) प्रजातियों के कुल 244 नवजात कछुओं को निर्धारित संरक्षण प्रोटोकॉल का पालन करते हुए उनके प्राकृतिक आवास गंगा नदी में सुरक्षित रूप से छोड़ा गया। खास बात यह रही कि इन कछुओं के अंडे जनपद कासगंज में गंगा नदी के तट से ही एकत्र किए गए थे। संरक्षण प्रक्रिया के तहत अंडों से विकसित हुए नवजात कछुओं को अनुकूल परिस्थितियों में तैयार करने के बाद दोबारा गंगा की धारा में छोड़ा गया।
विशेषज्ञों के अनुसार मीठे पानी के कछुए नदी के पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इनकी संख्या बढ़ाने और प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखने के लिए इस तरह के प्रयास बेहद अहम हैं। कार्यक्रम के माध्यम से गंगा की स्वच्छता के साथ-साथ उसकी जलीय जैव विविधता के संरक्षण का संदेश भी दिया गया।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी वीरेंद्र कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी संजीव कुमार, प्रो. एसके रावत, नोडल अधिकारी उच्च शिक्षा विभाग, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, सीनियर परियोजना अधिकारी हिमांशु शर्मा, संबंधित क्षेत्रीय वनाधिकारी, स्थानीय कृषक एवं अन्य हितधारक मौजूद रहे।
यह पहल गंगा संरक्षण की दिशा में सरकारी विभागों, WWF-इंडिया और स्थानीय समुदायों के साझा प्रयासों का उदाहरण बनी। साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि गंगा को केवल प्रदूषणमुक्त बनाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि उसमें रहने वाले जलीय जीवों और उनकी प्राकृतिक विरासत को बचाना भी उतना ही जरूरी है।