तेलुगु सिनेमा के अभिनेता नानी पिछले कुछ समय से अपनी फिल्मों के साथ लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं। पारिवारिक और सहज किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले नानी अब एक्शन फिल्मों में भी अपना दायरा बढ़ा रहे हैं। ‘द पैराडाइज’ इसी कोशिश का बड़ा उदाहरण है।
श्रीकांत ओडेला के निर्देशन में बनी यह फिल्म बड़े स्तर पर हिंसा, सत्ता, शोषण और बदले की कहानी कहने की कोशिश करती है। लेकिन मजबूत कलाकार और बड़े पैमाने के बावजूद फिल्म अपनी कहानी को उस मजबूती से नहीं संभाल पाती, जिसकी इससे उम्मीद थी। एक वक्त के बाद इससे चिढ़ होने लगती है। विलेन भी ऐसा है कि उससे डर लगने के बजाय जोकर वाली फील आती है। जानिए कैसी है यह फिल्म?
फिल्म की कहानी आजादी के बाद के सिकंदराबाद की पृष्ठभूमि में है। यहां एक हाशिए पर रहने वाला समुदाय बेहद खराब परिस्थितियों में जिंदगी गुजार रहा है। इस समुदाय पर मलिक का राज है, जो अपनी ताकत के दम पर लोगों का शोषण करता है।
समुदाय के पास न पर्याप्त साधन हैं, न सम्मान और न ही अपनी जिंदगी के फैसले लेने की आजादी। इसी समुदाय में जदाल (नानी) का जन्म होता है। बचपन से ही जदाल की पहचान और उसके जन्म को लेकर सवाल उठाए जाते हैं। मलिक के हाथों उसकी मां शमक्का (सोनाली कुलकर्णी) का सार्वजनिक अपमान जदाल के भीतर गहरा आक्रोश पैदा करता है।
यही अपमान आगे चलकर उसके जीवन का सबसे बड़ा मकसद बन जाता है। लेकिन जदाल की लड़ाई सिर्फ निजी बदले तक सीमित नहीं रहती। धीरे-धीरे उससे पूरे समुदाय को मलिक के अत्याचार से आजाद कराने की उम्मीद जुड़ जाती है।
मनोरंजन
नानी ने लगा दी जान पर बिखरी कहानी को नहीं संभाल पाए श्रीकांत
तेलुगु सिनेमा के अभिनेता नानी पिछले कुछ समय से अपनी फिल्मों के साथ लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं। पारिवारिक और सहज किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले नानी अब एक्शन फिल्मों में भी अपना दायरा बढ़ा रहे हैं। ‘द पैराडाइज’ इसी कोशिश का बड़ा उदाहरण है।
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