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गया; दो दिवसीय किसान मेला में खेत बचाओ अभियान, विधान सभा अध्यक्ष और कृषि मंत्री ने फीता काटकर किया शुभारंभ

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गया; दो दिवसीय किसान मेला में खेत बचाओ अभियान, विधान सभा अध्यक्ष और कृषि मंत्री ने फीता काटकर किया शुभारंभ
(05.11.2026/कृषि विभाग/गया)

*खेत बचाओ, जीवन बचाओ- श्री विजय कुमार सिन्हा, कृषि मंत्री, बिहार* 

1. *जैविक एवं प्राकृतिक खेती के तरीके को अपनाने के लिये किसानों को किया प्रोत्साहित* 
2. *रासायनिक खेती से खेत और मानव स्वास्थ्य को हो रहे नुकसान की दी जानकारी*
3. *मृदा स्वास्थ्य कार्ड में की गई अनुसंषा के आधार पर करें उर्वरकों का व्यवहार*

कृषि विभाग द्वारा हरिदास सेमिनरी, गया परिसर में दो दिवसीय किसान मेला-सह-प्रदर्षनी तथा एक दिवसीय ‘‘खेत बचाओ अभियान’’ का आयोजन किया गया है। माननीय डा॰ प्रेम कुमार, अध्यक्ष बिहार विधान सभा और माननीय श्री विजय कुमार सिन्हा, मंत्री कृषि विभाग-सह-प्रभारी मंत्री गया जिला द्वारा रीबन काट कर ‘‘किसान मेला-सह-प्रदर्षनी का शुभारम्भ किया गया और मेला में किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी देने के लिये लगाये गये स्टॉल का निरीक्षण किया। 
इसके साथ ही सांस्कृतिक भवन के प्रेक्षागृह में आयोजित ‘‘खेत बचाओ अभियान’’ का उद्घाटन दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर मंच पर माननीय अध्यक्ष बिहार, विधान सभा तथा माननीय मंत्री कृषि विभाग के साथ माननीय श्रीमती ज्योती देवी, विधायक बाराचट्टी, माननीय श्री रोमित कुमार, विधायक अतरी, श्रीमती नैना कुमारी, अध्यक्ष, जिला परिषद, गया, माननीय श्री प्रकाष राम (पटवा), उपाध्यक्ष, जिला नागरिक परिषद, गया,       श्री शषांक शुभंकर, जिला पदाधिकारी, गया सहित अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
इस अवसर पर सभा में उपस्थित किसानो एवं पदाधिकारियों को संबोधित करते हुये माननीय मंत्री कृषि विभाग ने कहा कि हरित क्रान्ति के दौर में किसानों ने राष्ट्रहित में खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने के लिये सराहनीय योगदान दिया जिसका परिणाम है कि आज भारत खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्म निर्भर हो गया है, परन्तु परम्परागत रुप से गौवंष से मिलने वाले गोबर, गौमूत्र के खेतों में उपयोग से नहीं करने के कारण और रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से धीरे-धीरे मृदा अस्वस्थ्य हो रही है और मानव तथा पशुओं में भी तरह-तरह की खतरनाक रोगों को देखा जा रहा है। इन सबसे बचने के लिये और आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिये भारतीय प्राकृतिक खेती की पद्धति और जैविक खेती के उपादानों का खेतों में प्रयोग किया जाना समय की मांग है। 
उन्होंने साथ ही कहा कि किसानों की यूनीक पहचान के लिये उनका फार्मर रजिस्ट्रेषन किया जा रहा है और आने वाले समय में उर्वरक, बीज आदि की आपूर्ति इसी के आधार पर किया जायेगा। किसानों से उन्होने मृदा स्वास्थ्य कार्ड में दी गई अनुषंसा के अनुसार उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने की अपील किया। 
माननीय अध्यक्ष, बिहार विधान सभा ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों सेसे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने, मिट्टी और जल का संरक्षण करने तथा टिकाऊ खेती को अपनाने की अपील किया और खेतों को बचाने, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने तथा बिहार को कृषि के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का संकल्प लेने को कहा। 
जिला पदाधिकारी गया ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा सभी प्रखण्डों की पंचायतों में कृषि जन कल्याण चौपाल-सह-खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत 26 अक्टूबर से कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं जो 30 नवम्बर तक लगातार आयोजित होंगे, अभी तक 177 स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किया गया है जिसमें 7354 महिला एवं 10627 पुरुष किसानों सहित कुल 17981 किसान भाग लिये हैं। 
इस अवसर पर माननीय अध्यक्ष बिहार विधान सभा एवं माननीय मंत्री कृषि विभाग ने 05 किसानों को कृषि योद्धा सम्मान से सम्मानित किया, जिसमें श्रीमती रीना कुमारी, शेरघाटी प्रखण्ड को किसान उत्पादक संगठन के माध्यम से जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लिये, श्रीमती ममता कुमारी, खिजरसराय प्रखण्ड को समेकित कृषि प्रणाली अपनाने, श्रीमती अनीता कुमारी, डुमरिया प्रखण्ड को समूह में जैविक आलू तथा सब्जी की खेती करने, श्री धनन्जय कुमार, गुरारु प्रखण्ड को आधुनिक कृषि यंत्रों से दलहल एवं तिलहन की खेती के लिये, श्री धर्मेन्द्र कुमार, नगर प्रखण्ड को लीज पर जमीन लेकर उद्यानिक फसलों की खेती करने के लिये सम्मानित किया गया।  साथ ही कृषि यंत्रीकरण योजना अंतर्गत कृषि यंत्र बैंक के लिए लॉटरी के माध्यम से चयनित 04 लाभार्थियों को कार्य परमिट सौपाI
कार्यक्रम में श्री शैलेष कुमार, संयुक्त निदेषक (षष्य), मगध प्रमण्डल, गया, श्री संजीव कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी-सह-परियोजना निदेषक, आत्मा, ई॰ मनोज कुमार राय, वरीय वैज्ञानिक-सह-प्रधान कृषि विज्ञान केन्द्र, मानपुर, ई॰ विमलेष कुमार पाण्डेय, वरीय वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र, आमस सहित मुख्यालय पटना, जिला एवं अनुमण्डल तथा प्रखण्डों के पदाधिकारी और कर्मियों के साथ सभी प्रखण्डों के लगभग 1000 किसान उपस्थित थे।