फर्रुखाबाद:(द दस्तक 24 न्यूज) 08 अक्टूबर 2026 मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर फर्रुखाबाद के टाउन हॉल पार्क में 8 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो गया। आंदोलन का नेतृत्व मोहम्मद शहेजान मंसूरी कर रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं, बल्कि आम जनता और कथित रूप से पीड़ित मतदाताओं की ओर से चलाया जा रहा है।
आयोजकों के मुताबिक आंदोलन में सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और आम नागरिकों के शामिल होने के लिए अपील की गई है। उनका कहना है कि आंदोलन को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा।
धरने की शुरुआत के अवसर पर टाउन हॉल पार्क में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। इसके बाद देशभक्ति के नारे लगाए गए और राष्ट्रगान हुआ। राष्ट्रगान के बाद प्रदर्शनकारियों ने “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो” और “वोट चोरों गद्दी छोड़ो” जैसे नारे लगाए।
आंदोलन के पहले दिन आम आदमी पार्टी के फर्रुखाबाद जिलाध्यक्ष नीरज प्रताप शाक्य भी सुबह करीब 9 बजे टाउन हॉल पार्क पहुंचे और धरने को अपना समर्थन दिया। इस दौरान उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ा राजनीतिक बयान दिया और उनके पद पर बने रहने पर सवाल उठाए। उनका बयान उनके व्यक्तिगत राजनीतिक वक्तव्य के रूप में सामने आया।
धरने का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद शहेजान मंसूरी ने कहा कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा और जब तक इस्तीफा नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। आयोजकों ने टाउन हॉल पार्क में अनिश्चितकालीन रूप से धरना जारी रखने की बात कही है।
आयोजकों के अनुसार आंदोलन के पहले दिन करीब 30 से 40 लोग टाउन हॉल पार्क पहुंचे। शहेजान मंसूरी ने कहा कि आने वाले दिनों में आंदोलन में और लोगों के शामिल होने की संभावना है। हालांकि, आंदोलन में भविष्य में कितनी संख्या में लोग शामिल होंगे, इसे लेकर कोई निश्चित दावा नहीं किया गया है।
आयोजकों का कहना है कि आंदोलन को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा हो रही है और फर्रुखाबाद के कई लोगों ने धरने में शामिल होकर समर्थन देने की इच्छा जताई है।
फिलहाल मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की है। आयोजकों ने आंदोलन को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाने की बात कही है। टाउन हॉल पार्क में शुरू हुआ यह धरना स्थानीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। अब आने वाले दिनों में आंदोलन की भागीदारी और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।