Friday, 23 October 2026 | 12:43 PM
उत्तर प्रदेश

कासगंज: आजादी के दशकों बाद भी सड़क को तरस रहा नगला लक्ष्मण, मरीजों को नहीं मिल पा रही एंबुलेंस की सुविधा

पटियाली के प्रतापपुर ग्राम पंचायत का नगला लक्ष्मण विकास से अछूता, ग्रामीणों का आरोप—अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक लगाई गुहार, फिर भी नहीं हुई सुनवाई
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कासगंज: आजादी के दशकों बाद भी सड़क को तरस रहा नगला लक्ष्मण, मरीजों को नहीं मिल पा रही एंबुलेंस की सुविधा
कासगंज। सरकारें बदलती रहीं, विकास के दावे होते रहे, लेकिन पटियाली विधानसभा क्षेत्र के पटियाली ब्लॉक की ग्राम पंचायत प्रतापपुर के नगला लक्ष्मण की तस्वीर नहीं बदली। यहां बदहाल सड़कें, गंदगी से जूझती नालियां और बुनियादी सुविधाओं का अभाव ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा रहा है। हालात ऐसे हैं कि गांव में एंबुलेंस तक पहुंचना मुश्किल है। गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की चिंता ग्रामीणों को सताती रहती है।

ग्रामीणों के मुताबिक, नगला लक्ष्मण की सड़क की मरम्मत हुए 20 साल से अधिक समय बीत चुका है। सड़क की हालत इतनी खराब है कि लोगों को रोजाना आवागमन में परेशानी उठानी पड़ती है। ग्रामीणों का आरोप है कि आजादी के बाद से गांव में सुरक्षित आवागमन के लिए पक्की सड़क की समुचित व्यवस्था नहीं हो सकी। बरसों से सड़क निर्माण और मरम्मत की मांग की जा रही है, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

दो बूथों तक पहुंचना भी ग्रामीणों के लिए चुनौती

नगला लक्ष्मण में दो मतदान बूथ हैं। ग्रामीणों के अनुसार, चुनाव के दौरान सड़क की खराब स्थिति के कारण बसें मुख्य मार्ग पर ही खड़ी करनी पड़ती हैं। इसके बाद मतदान संबंधी अधिकारी और कर्मचारी पैदल ही ईवीएम व अन्य चुनाव सामग्री लेकर बूथों तक पहुंचते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मतदान के लिए आने-जाने वाले लोगों को भी पैदल या मोटरसाइकिल का सहारा लेना पड़ता है। नगला लक्ष्मण के साथ नगला फुलू चांदपुर और प्रतापपुर के मतदाताओं के लिए भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है।

गर्भवती महिलाओं और मरीजों की बढ़ती मुश्किलें

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाली का सबसे गंभीर असर आपातकालीन परिस्थितियों में पड़ता है। गर्भवती महिलाओं और बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है, क्योंकि एंबुलेंस गांव तक आसानी से नहीं पहुंच पाती। ऐसे में समय पर इलाज मिलना चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब गांव तक एंबुलेंस पहुंचने का रास्ता ही दुरुस्त नहीं है, तो आपातकाल में लोगों को राहत कैसे मिलेगी?

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को दिए प्रार्थनापत्र, कार्रवाई का इंतजार

ग्रामीण अभिषेक कुमार ने बताया कि सड़क की समस्या को लेकर कई बार अधिकारियों, विधायक और सांसद को पत्र देकर शिकायत की जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से मांग उठाने के बाद भी सड़क निर्माण या मरम्मत की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

विधवा महिलाओं को पेंशन न मिलने का भी आरोप

गांव में विकास कार्यों के साथ सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में कई विधवा महिलाएं हैं, जिन्हें विधवा पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि पात्र महिलाओं की जांच कराकर उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।

ग्रामीणों ने उठाई सड़क निर्माण की मांग

ग्रामीण सोनू, अभिषेक, अवनीश, भूप सिंह, सुमित यादव, आशीष सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से जल्द सड़क की मरम्मत कराने और आवश्यकता के अनुसार नई सड़क बनवाने की मांग की है। साथ ही नालियों की सफाई और पात्र विधवा महिलाओं को पेंशन दिलाने की मांग भी उठाई है।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों के विकास और बेहतर सुविधाओं के दावे करती है, लेकिन नगला लक्ष्मण की स्थिति उन दावों पर सवाल खड़े करती है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी ग्रामीणों की इस समस्या को कब गंभीरता से लेते हैं और बदहाल सड़क से मुक्ति दिलाने के लिए कब ठोस कदम उठाते हैं।

पीडब्ल्यूडी के जेई मोहम्मद नईम ने पत्र दिखाते हुए बताया कि विभाग ने अपने स्तर से कई सड़कों के एस्टीमेट बनाकर मुख्यालय को भेजे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि विभाग ने कार्रवाई नहीं की। पिछले तीन वर्षों से लगातार प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं, लेकिन मुख्यालय से अब तक स्वीकृति नहीं मिली है। अब विभाग को स्वीकृति मिलने का इंतजार है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे भूख हड़ताल करने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से परेशान हैं और आगामी चुनावों में मतदान का बहिष्कार करने पर भी विचार कर रहे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकारें ‘सबका साथ, सबका विकास’ का दावा करती हैं, लेकिन नगला लक्ष्मण की समस्या पर जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग की है।