Tuesday, 15 September 2026 | 7:08 PM
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32 साल का इंतजार खत्म, राजस्थान पहुंचेगा यमुना का पानी,

राजस्थान की पानी की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक को दूर करने की दिशा में सोमवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है. नई दिल्ली में राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. करीब 32 सालों से अटकी इस परियोजना के लिए अब दोनों राज्यों द्वारा औपचारिक सहमति दे दी गई है, जिसके स
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32 साल का इंतजार खत्म, राजस्थान पहुंचेगा यमुना का पानी,
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राजस्थान की पानी की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक को दूर करने की दिशा में सोमवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है. नई दिल्ली में राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल समझौते (MoA) पर हस्ताक्षर किए गए हैं. करीब 32 सालों से अटकी इस परियोजना के लिए अब दोनों राज्यों द्वारा औपचारिक सहमति दे दी गई है, जिसके साथ ही राजस्थान के लिए यमुना का पानी लाए जाने का रास्ता लगभग पूरी तरह साफ कर दिया गया है.

इस अहम समझौते पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए. इसके साथ ही यह परियोजना अब कागजों से निकलकर क्रियान्वयन के निर्णायक चरण में पहुंचा दी गई है.

इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा शेखावाटी क्षेत्र को पहुंचाया जाएगा. सीकर, झुंझुनूं और चूरू समेत कई ऐसे इलाके, जहां बरसों से पेयजल का भारी संकट देखा जाता रहा है और लोगों को भूजल व टैंकरों पर निर्भर रखा गया है, वहां अब पानी की स्थायी व्यवस्था स्थापित किए जाने की उम्मीद है. इससे भूजल पर दबाव कम किया जा सकेगा, गिरते जलस्तर को संभाला जा सकेगा और किसानों व उद्योगों के लिए भी पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा.
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की कुल लागत करीब 34,102 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसके तहत राजस्थान को उसके हिस्से का 577 एमसीएम (MCM) यमुना जल प्रदान किया जाएगा. यह पानी हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से 295.5 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन के माध्यम से चूरू जिले के हंसियावास जलाशय तक पहुंचाया जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए 3.6 मीटर व्यास की तीन बड़ी भूमिगत पाइपलाइनों, आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली, निरीक्षण सड़क और कृत्रिम जलाशय का निर्माण किया जाएगा.

राजस्थान सरकार द्वारा बताया गया है कि परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) पहले ही तैयार कर केंद्रीय जल आयोग को भेजी जा चुकी है. वहीं, हरियाणा द्वारा भी पाइपलाइन के अलाइनमेंट को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है. अब इस परियोजना के सफल निर्माण और सुचारू संचालन के लिए 'राजस्थान-हरियाणा यमुना वाटर प्रोजेक्ट स्पेशल पर्पस व्हीकल' (SPV) का गठन किया जाएगा.

अगर तय समय पर यह कार्य पूरा किया जाता है, तो यह न केवल एक जल परियोजना होगी, बल्कि राजस्थान और विशेषकर शेखावाटी क्षेत्र की जल सुरक्षा, कृषि और भविष्य की सबसे बड़ी जीवनरेखा साबित की जा सकेगी.