बीजेपी जहां UCC को लेकर आगे बढ़ने की बात कर रही है, वहीं बिहार में उसकी सहयोगी JDU ने इस मुद्दे पर अपनी अलग स्थिति स्पष्ट की है। JDU की ओर से कहा गया है कि पार्टी बिहार में UCC लागू करने के पक्ष में नहीं है।
नीतीश कुमार की पार्टी ने जताई आपत्ति

इस बीच JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी चर्चा में रही। ऐसे में NDA के भीतर UCC को लेकर आगे की रणनीति पर राजनीतिक नजरें टिक गई हैं।
चिराग पासवान ने रखी अपनी बात

उनका कहना है कि भारत एक विविधतापूर्ण देश है और किसी भी कानून पर फैसला लेने से पहले उसके प्रावधानों और विभिन्न समुदायों पर पड़ने वाले प्रभाव को समझना जरूरी है।
आखिर UCC क्या है?
Uniform Civil Code यानी समान नागरिक संहिता का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में बढ़ना है।
भारत में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है। UCC इसी बहस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
NDA के भीतर अलग-अलग रूख
UCC पर बिहार में स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि BJP और उसके सहयोगी दलों के रुख में अंतर दिखाई दे रहा है।
जहां बीजेपी UCC को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रही है, वहीं JDU ने बिहार के संदर्भ में अपनी आपत्ति जाहिर की है। दूसरी ओर चिराग पासवान ने ड्राफ्ट सार्वजनिक होने के बाद विस्तृत चर्चा की जरूरत बताई है।
फिलहाल UCC का अंतिम राष्ट्रीय प्रारूप सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में केंद्र सरकार और उसके सहयोगी दलों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा और उनके आधिकारिक बयानों से स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
बिहार की सियासत में अब नजर इस बात पर है कि UCC के प्रस्तावित ड्राफ्ट के सामने आने के बाद NDA के भीतर सहयोगी दलों का रुख किस तरह सामने आता है।