Tuesday, 22 September 2026 | 11:50 PM
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जौनपुर :नाथुपुर ग्राम पंचायत में स्वयं सहायता समूह के जरिए सफल हुआ आरआरसी मॉडल

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जौनपुर :नाथुपुर ग्राम पंचायत में स्वयं सहायता समूह के जरिए सफल हुआ आरआरसी मॉडल
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जौनपुर :सफलता की कहानी

नाथुपुर ग्राम पंचायत में स्वयं सहायता समूह के जरिए सफल हुआ आरआरसी मॉडल

कचरा प्रबंधन के साथ आजीविका का भी बना मजबूत माध्यम

         विकास खंड सिरकोनी की ग्राम पंचायत नाथुपुर ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में प्रभावी पहल करते हुए रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) के संचालन को स्वयं सहायता समूह से जोड़कर एक सफल मॉडल प्रस्तुत किया है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-2 के अंतर्गत संचालित इस पहल से गांव में नियमित कूड़ा संग्रहण एवं कचरा प्रबंधन के साथ-साथ स्वयं सहायता समूह के सदस्यों के लिए आजीविका का अवसर भी सृजित हुआ है।

          आरआरसी के संचालन की शुरुआत ग्राम पंचायत द्वारा केंद्रीय वित्त आयोग के टाइड फंड से ई-रिक्शा एवं आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था के साथ किया गया, लेकिन यह नियमित रुप से संचालित नहीं हो पाया। क्योकि नियुक्त व्यक्त का इस कार्य से आय या प्रेरणा का सीधा सम्बन्ध नहीं था, ऐसे में वह व्यक्ति केवल एक कर्मी बनकर रह गया, जिसकी ग्राम पंचायत पर आर्थिक निर्भरता थी, जिसके कारण कुछ समय बाद केन्द्र निष्क्रिय हो गए। तत्पश्चात प्रयास हुआ कि ग्रामवासियों एवं दुकानदारों से शुल्क लेकर कूड़ा एकत्र कर आरआरसी चलाया जाए, लेकिन यह माॅडल भी दीर्घकालिक रुप से सफल नहीं हो सका, क्योकि नियमित भुगतान में असहमति एवं सहभागिता की कमी सामने आई।

          इन अनुभवों से सीख लेते हुए ग्राम पंचायत एवं प्रशासन द्वारा स्वयं सहायता समूह को आरआरसी संचालन की जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया गया। ग्राम पंचायत की ओर से समूह को आरआरसी, बिजली एवं जल आपूर्ति, संपर्क मार्ग, सक्रिय ई-रिक्शा तथा प्रारंभिक संचालन सहयोग उपलब्ध कराया गया। समूह को यह जिम्मेदारी दी गई कि उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए गांव में नियमित कूड़ा संग्रहण, कचरे का निस्तारण एवं रीसाइक्लिंग सुनिश्चित की जाए।

          समूह के सदस्यों को विकास खंड स्तर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एवं आरआरसी संचालन का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान स्थानीय कबाड़ दुकानों का भ्रमण कराकर कचरे के मूल्य एवं उसके उचित प्रबंधन की जानकारी दी गई। विशेष रूप से प्लास्टिक कचरे की सफाई, वर्गीकरण, बंडलिंग एवं मूल्य संवर्धन की प्रक्रिया समझाई गई, जिससे पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को बेहतर मूल्य पर बेचकर आय अर्जित की जा सके।

          नई व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम अब गांव में दिखाई दे रहे हैं। ग्राम पंचायत के परिवारों द्वारा घरों में ही गीले एवं सूखे कचरे का पृथक्करण किया जा रहा है। निर्धारित रोस्टर के अनुसार प्रतिदिन कूड़ा वाहन गांव में पहुंचकर घर-घर से कचरा एकत्र करता है। एकत्रित कचरे को आरआरसी पर लाकर उसका पृथक्करण एवं उचित निस्तारण किया जाता है।

          इस व्यवस्था से जहां गांव की स्वच्छता व्यवस्था मजबूत हुई है, वहीं स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को कचरे से आय सृजन का व्यावहारिक अवसर मिला है। ग्रामीणों में भी स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है और कचरा पृथक्करण एवं नियमित कूड़ा संग्रहण अब दैनिक व्यवहार का हिस्सा बनता जा रहा है।

              नाथुपुर ग्राम पंचायत का यह प्रयास कचरा प्रबंधन को आजीविका से जोड़ते हुए ग्रामीण स्तर पर स्वच्छता, जनभागीदारी और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करता है।
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