Friday, 30 October 2026 | 7:31 PM
उत्तर प्रदेश

कासगंज : अभावों से राष्ट्रीय अखाड़े तक संघर्ष की गाथा: 'फेरी वाले गुरुजी' इंजीनियर बलवीर सिंह की पहल से कासगंज में मुफ़्त शिक्षा व खेल का नया सवेरा

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  कासगंज : अभावों से राष्ट्रीय अखाड़े तक संघर्ष की गाथा: 'फेरी वाले गुरुजी' इंजीनियर बलवीर सिंह की पहल से कासगंज में मुफ़्त शिक्षा व खेल का नया सवेरा
कासगंज । जनपद के तहसील सहावर स्थित ग्राम हीरापुर (खोजपुर) निवासी एवं अत्यंत साधारण परिवार के लाल 'फेरी वाले गुरुजी' नाम से चर्चित इंजीनियर बलवीर सिंह ने अपने अदम्य साहस, संघर्ष और जिजीविषा के बल पर समाज-सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में नई अलख जगाई है। बचपन में पिता श्री नारायण सिंह के साथ कड़ाके की ठंड में पूर्वांचल के गाँवों में ऊनी शॉल की फेरी लगाने से लेकर सड़क किनारे रातें गुजारने वाले बलवीर सिंह की जीवन-यात्रा आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गई है। अभावों से घिरे होने के बावजूद उन्होंने अखाड़े में अपनी प्रतिभा का परचम लहराते हुए वर्ष 2006 में कानपुर में आयोजित अखिल भारतीय कुश्ती चयन प्रतियोगिता (SGFI से मान्यता प्राप्त) में प्रथम स्थान (गोल्ड मेडल) प्राप्त किया। इसके साथ ही उन्होंने 52वीं नेशनल स्कूल गेम्स (U-17) और वर्ष 2007 में भुवनेश्वर (ओडिशा) में आयोजित 20वें राष्ट्रीय खेलकूद समारोह की 50 किग्रा कुश्ती प्रतियोगिता (तरुण वर्ग) में द्वितीय स्थान प्राप्त कर क्षेत्र का नाम रोशन किया।
हालाँकि, उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन के बाद भी उचित स्पॉन्सरशिप और आर्थिक संसाधनों के अभाव में खेल के मैदान में आगे बढ़ने का उनका सपना अधूरा रह गया। किंतु, हार मानने के बजाय उन्होंने शिक्षा का मार्ग चुना और सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा तथा बी.टेक की उपाधि हासिल की। इसी दौरान नियति ने उनकी कठिन परीक्षा ली और वे एक अत्यंत गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए, जहाँ चिकित्सकों ने भी जीवन की उम्मीद छोड़ दी थी। अपनी सुदृढ़ इच्छाशक्ति से बीमारी को पूरी तरह शिकस्त देने के बाद उन्होंने सीमित साधनों और मोबाइल के 'जुगाड़' से बने डिजिटल सेटअप के ज़रिए यूट्यूब पर 'नारायणा कोचिंग क्लासेस'  की शुरुआत की। आज उनके पढ़ाए डिजिटल लेक्चर्स भारत के कोने-कोने के साथ-साथ नेपाल और पाकिस्तान से भी लाखों छात्र देखते हैं। अब तक 3.5 लाख से अधिक विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दे चुके बलवीर सिंह के दर्जनों पढ़ाए छात्र देश के विभिन्न सरकारी विभागों में जूनियर इंजीनियर (JE) व असिस्टेंट इंजीनियर (AE) पदों पर ऑल इंडिया टॉप रैंकर्स के रूप में सेवारत हैं।
जीवन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर 'फेरी वाले गुरुजी' इंजीनियर बलवीर सिंह ने अपनी जन्मभूमि कासगंज के गरीब, वंचित और मध्यमवर्गीय बच्चों के लिए शिक्षा व खेलकूद का नया अध्याय शुरू करने का संकल्प लिया है। उनका उद्देश्य है कि क्षेत्र का कोई भी मेधावी बच्चा आर्थिक तंगी या स्पॉन्सरशिप के अभाव में पीछे न छूटे। इसके तहत वे अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से पॉलिटेक्निक और बी.टेक सिविल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को हिंदी व अंग्रेजी माध्यम में पूरी तरह नि:शुल्क और आसान भाषा में डिजिटल शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर युवाओं को सही करियर काउंसलिंग, खेल प्रोत्साहन और प्रेरक सत्रों के माध्यम से एक नई दिशा दी जा रही है।
विभिन्न सामाजिक मंचों पर सम्मानित हो चुके इंजीनियर बलवीर सिंह का कहना है कि अध्यापन उनका मुख्य ध्येय (पैशन) है। कासगंज की माटी के बच्चों को नि:शुल्क गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व खेलकूद के नए अवसर प्रदान कर देश की मुख्यधारा से जोड़ना ही अब उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य है। कासगंज के युवाओं और अभिभावकों ने उनके इस निःस्वार्थ प्रयास की भूरी-भूरी प्रशंसा की है।